सोमवार, 9 मार्च 2009

क्या आपके कंप्यूटर सिस्टम में भी है खतरनाक न्यू फोल्डर वायरस !!!

क्या आपका कंप्यूटर स्लो काम करता है? क्या टास्क मैनेजर और रजिस्ट्री एडिट काम नहीं कर रहा है? फोल्डर ऑप्शंस भी नहीं रहा है? आपके सिस्टम के हर फोल्डर के अन्दर उसी नाम का एक और हिडेन फोल्डर दिख रहा है? उदाहरण के लिए New Folder नाम के फोल्डर में New Folder.exe नाम का एक हिडेन फोल्डर है?
अगर इन सवालों का जवाब हाँ में है तो सावधान हो जाएँ क्योंकि आपका कंप्यूटर खतरे में है आपके कंप्यूटर में न्यू फोल्डर वायरस हो सकता है

आख़िर क्या है यह न्यू फोल्डर वायरस ?
यह एक ऐसा वायरस है जिसे अधिकाँश एंटीवायरस सोफ्ट्वेयरस नहीं पकड़ पाते कई दिनों तक तो आपको पता भी नहीं चलेगा की आपके सिस्टम में कोई वायरस है इसे पेन ड्राइव वायरस भी कहते हैं क्योंकि जैसे ही आप कोई पेन ड्राईव किसी इन्फेक्टेड पीसी में लगाते हैं यह वायरस पेन ड्राइव में जाता है और फ़िर जहाँ भी वह पेन ड्राईव जायेगा अपने साथ इसे लेता जायेगा इस तरह यह किसी कंपनी या संस्थान के सभी सिस्टमों तक पहुँच जाता है हमारे जेएनयू के लगभग हर कंप्यूटर में यह वायरस है चाहे वह लाइब्रेरी का कंप्यूटर हो, सायबर कैफे का या पर्सनल यह बड़ी तेजी से फैलता है सिस्टम में प्रवेश करते ही यह वायरस हर फोल्डर के अन्दर उसी नाम का एक और .exe फोल्डर बना लेता है जो की डिलीट नहीं होता इस तरह आपके सिस्टम में हजारों वायरस हो जाते हैं समस्या यह है की अधिकांश एंटीवायरस प्रोग्राम इसे डीटेक्ट ही नहीं कर पाते, रीमूव करना तो दूर की बात है

क्या खतरे हैं इस वायरस के?
)
यह सिस्टम के स्टार्ट अप में जगह बना लेता है और बूट होते ही अपने आप काम करना शुरू कर देता है यह अकेले आपके पीसी प्रोसेसर का ५० % से अधिक कंज्यूम करता है तो जाहिर है की सिस्टम की स्पीड आधी से भी कम हो जायेगी
) यह टास्क मैनेजर को डिसेबल कर सकता है यानी Ctrl+Alt+Del का ऑप्शन काम नही करेगा
) सिस्टम कॉन्फिगरेशन और रजिस्ट्री एडिट प्रोग्राम को भी यह डिसेबल कर सकता है यानी स्टार्ट मेन्यू के "Run" से आप msconfig और regedit जैसी कमांड नहीं चला सकते हैं
) यह My Computer और Window Explorer से Folder Options का ऑप्शन ही गायब कर देता है यानी अगर आप किसी फाइल को हिडेन करना चाहें या हिडेन फाइल को देखना चाहें तो ऐसा नहीं कर पाएंगे
) आपके सिस्टम में लगाये जाने वाले हर रिमुवेवल डीवाईस में यह वायरस प्रवेश कर जाता है
) यह My Computer में मेमोरी ड्राइव्स को डबल क्लिक करके खोलने के सिस्टम को भी डिसेबल कर सकता है
) सबसे बड़ी बात की इस वायरस के लंबे समय तक एक्टिव रहने पर आपका Operating System भी क्रैश कर सकता है
(जरूरी नहीं की ये सारी समस्याएँ एक साथ शुरू हों कभी कभी काफी दिनों तक वायरस के कोई लक्षण दिखाई नहीं पड़ते)

कैसे हटाएँ न्यू फोल्डर वायरस
इस वायरस को हटाने के फड एक बहुत सरल तरीका बता रहा हूँ एक प्रोग्राम है - कौम्बोफिक्स यह देखने में बड़ा छोटा है (. MB) पर इस वायरस के लिए रामबाण के समान है

आपको करना बस ये है कि नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर कोम्बोफिक्स को डाउनलोड करें. डेस्कटॉप पर नीचे दिए चित्र की तरह एक फाइल सेव हो जायेगी

अब सारी विंडोज को बंद कर दें और अगर कोइ एंटीवायरस चल रहा हो तो उसे थोड़ी देर के लिए डिसेबल कर दें. अब आप कोम्बोफिक्स के आइकन पर डबल क्लीक कर उसे रन कर सकते हैं. ध्यान रहे की कोम्बोफिक्स के चलने के दौरान कोइ अन्य प्रोग्राम रन करें. कोम्बोफिक्स सारे डुप्लीकेट .exe हिडेन फोल्डर्स को डिलीट करके उनकी डिटेल्स एक लॉग फाइल के रूप में शो करेगा.



कोम्बोफिक्स डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें

महत्वपूर्ण सूचना: वैसे तो यह सोफ्टवेयर पूरी तरह टेस्टेड है पर किसी अवांछित परिणाम या नुकसान के लिए यह ब्लॉग जिम्मेदार नहीं है.

रविवार, 8 मार्च 2009

टिप्पणी करते समय इन बातों का ध्यान रखें




ब्लॉगजगत में टिप्पणियों के महत्त्व से भला कौन ब्लॉगर अपरिचित होगा। और वो भी हिन्दी ब्लॉगजगत में जहाँ ब्लॉगरों की संख्या कुछ हजार तक सीमित है। यहाँ ब्लोगर ही एक दूसरे को पढ़ते हैं; नान-ब्लोगर पाठकों की संख्या नही के बराबर है। ऐसे में सार्थक टिप्पणियाँ जहाँ ब्लोगर का उत्साहवर्द्धन करके उसे और अच्छा और नियमित लिखने को प्रेरित करती हैं वहीं टिप्पणी के अभाव में कई ब्लॉग शैशवावस्था में ही दम तोड़ देते हैं। इसलिए यह बात तो तय है की टिप्पणी न करने से तो कैसी भी टिप्पणी करना अच्छा है। बिन-मामा वाले से काना मामा वाला अच्छा! पर अगर टिप्पणी करते समय कुछ बातों का ख़याल रखा जाए तो न सिर्फ़ ब्लोगर को सच्चे प्रोत्साहन का आनंद मिलेगा बल्कि ब्लॉगजगत में आपकी भी एक अच्छी छवि बनेगी। यहाँ मैंने ध्यान रखने लायक कुछ बातों को गिनाया है : -

१) पोस्ट को पूरा पढ़े बिना टिप्पणी न करें : - कई लोग अधिक से अधिक ब्लॉगस पर टिप्पणी करने के चक्कर में पोस्ट को बिना पढ़े ही टिप्पणी करते चलते हैं। ऐसी टिप्पणियाँ कभी कभी तो खप जाती हैं पर कभी कभी इनका घातक अर्थ और प्रभाव भी हो सकता है। जैसे किसी ने अपने किसी प्रिय के बिछुड़ने के बारे में लिखा है और आप उसपर "बहुत अच्छे" या "बधाई" टिपिया आए हैं। वैसे लंबे समय के बाद कई लोगों को अनुभव हो जाता है कि पोस्ट का शीर्षक देखकर ही कैसे सटीक टिप्पणी मारी जाए। पर मेरी सलाह है कि समय अभाव में पोस्ट को पूरा नही पढ़ पाएं तो कम से कम सरसरी तौर पर निगाह तो दौडा ही लें। पोस्ट के अनुकूल टिप्पणी मिलने पर लेखक जहाँ प्रसन्न होता है वहीं बिल्कुल अलग टिप्पणी देखकर छला हुआ महसूस करता है।

२) एक शब्द की टिप्पणी करें - माना की मंदी का दौर है; पर ऐसी भी क्या कंजूसी! कई बार बहुत मेहनत से लिखी गई पोस्ट पर हम सिर्फ़ "सुंदर", "बहुत अच्छा", "शुभकामनाएं" आदि लिखकर चल देते हैं। ऐसे में लेखक को चोट पहुँचती है। यह तो उसी प्रकार हुआ कि प्यासे के मुंह में दो बूँद पानी गिरा के चल दिए। हालांकि कभी कभी जल्दबाजी में ऐसा करना पड़ता है। पर अगर समय मिले तो अच्छी पोस्ट पर दुबारा जाकर अच्छे से टिप्पणी करें।

३) हस्ताक्षर करें - अगर आप बेनामी टिप्पणी नही कर रहे हों, यानि कि ब्लॉगर या किसी अन्य अकाउंट में पहले से साइन इन हैं तो आपका नाम स्वतः टिप्पणी के साथ आ जाता है; वो भी आपके ब्लॉग के लिंक के साथ। इसलिए दुबारा से नीचे नाम लिखने की कोई आवश्यकता ही नही है। यह ब्लॉगर के साथ- साथ अन्य पाठकों को भी इरिटेट करता है। टिप्पणी कोई पत्र नहीं है जिसे आप "प्रिय फलाना" से शुरू करें और "आपका प्यारा चिलाना" से ख़त्म करें। इसके अलावा टिप्पणी में कोई अन्य व्यक्तिगत जानकारी जैसे फोन नंबर, ई-मेल आईडी वगैरह भी न डालें।

४) रंग-रोगन या साज-सज्जा करें - कई लोग टिप्पणियों को बोल्ड, इटैलिक और अंडरलाइनअक्षरों से सुसज्जित करते हैं। यहाँ यह बात ध्यान रखने योग्य है कि आपकी टिप्पणी का महत्व सजावट से नहीं बल्कि उसकी गुणवत्ता से बढ़ता है। कुछ सार्थक लिखें; पोस्ट की विषयवस्तु से जुड़े अपने अनुभव बांटे, कोई जिज्ञासा रखें अथवा उसके विरोध में ही अपनी राय रखें। इस प्रकार की एक अच्छी टिप्पणी आपको कई नियमित पाठक दिला सकती है। ध्यान रखें कि आपकी टिप्पणी आपके रेज्यूमे की तरह है जिससे आप पाठकों को लुभा कर अपने ब्लॉग तक खींच सकते हैं।

५) लिंक्स देने की आदत न बनाएं - कई टिप्पणीकार अपनी हर टिप्पणी में अपने ब्लॉगस का लिंक चिपका देते हैं। यह एक प्रकार की स्पैमिंग है। हो सकता है कि इस तरह आप ५-१० हिट्स पा लें पर इससे आपकी जो छवि बनती है वह कहीं ज्यादा पाठकों को आपसे दूर ले जाएगी। आपकी टिप्पणी आपके ब्लॉग का आइना है। इसपर मेहनत करें, रोचक टिप्पणियां लिखें। यह आपको लिंक्स से ज्यादा हिट्स दिलाएगा। हाँ, अगर पोस्ट से संबधित कोई उपयोगी जानकारी किसी वेबसाईट पर उपलब्ध है और आप उसे शेयर करना चाहते हैं तो लिंक्स दिए जा सकते हैं।

6) अभद्र भाषा का प्रयोग करें - अगर आप लेखक के विचारों से पूरी तरह असहमत भी हैं तो संतुलित और विनम्र भाषा में तर्कों के साथ अपनी बात रखें। व्यक्तिगत आक्षेपों से बचें। हाँ, होली वगैरह के मौके पर थोडा बहुत मजाक खप जायेगा।

७) बाबा बनें - कई लोग पोस्ट पर इस प्रकार समझाने के लहजे में टिप्पणी करते हैं जैसे उन्होंने उस विषय में शोध कर रखा हो और लिखने वाला निरा बुद्धू है। जैसे "थोडा और अच्छा लिख सकते थे. ऐसे ही लिखते रहो। बहुत आगे जाओगे", "अच्छा लिखा है पर धार में थोड़ी कमी है" इत्यादि। ऐसी बाबा टाइप टिप्पणियों से बचें (अगर आपने सचमुच उस विषय पर शोध कर रखा हो तो भी)।

अंत में कुछ छिटपुट सुझाव - टिप्पणी करने के बाद पोस्ट बटन दबाने से पहले देख लें कि कहीं वर्तनी वगैरह की अशुद्धि तो नहीं है अथवा कोई और भयंकर गलती तो नहीं है। कभी कभी बड़ी हास्यास्पद और मूर्खतापूर्ण गलतियां हो जाती हैं। हम बाद में टिप्पणी को एडिट तो कर नहीं सकते। मोडरेशन है तो ब्लोगर की दया वरना तो बेइज्जती है ही।

बाकी
, इन सब बातों को दिल पर न लें मस्ती से टिपियाते रहें। आज बस उपदेश देने का मूड हो लिया था। इसलिए लिख मारे। आप सबको होली की हार्दिक शुभकामनाएं।
(वैसे यहाँ हर प्रकार की टिप्पणियों का स्वागत है। कहते हैं न कि बिन-मामा वाले से काना मामा वाला अच्छा!)

मंगलवार, 3 मार्च 2009

११ साल की एक लडकी जो अपनी कलम से तालिबान से लड़ रही है



इस लडकी का नाम है तुबा सहाब (Tuba Sahaab)। उम्र - ११ साल। रहती है इस्लामाबाद, पाकिस्तान के बाहरी इलाके में जो तालिबान का गढ़ माने जाने वाले स्वात घाटी से मात्र दो घंटे की दूरी पर है। इसकी तस्वीर को देखकर अगर आप इसे एक साधारण स्कूल की छात्रा समझ रहे हैं तो जनाब, आप ग़लत हैं। इस लडकी ने एक ऐसी जंग छेड़ी है जिसके बारे में सोचने मात्र से अच्छे-अच्छों के हौसले पस्त हो जाएँ। तुबा ने जंग छेड़ी है उस कट्टरपंथी इस्लामी संगठन तालिबान के ख़िलाफ़ जिसने अमेरिका जैसी विश्व शक्ति को भी हिला कर रख दिया था। और वह भी उस क्षेत्र में जहाँ जाने से मानवाधिकार संगठन भी डरते हैं। जहाँ तालिबान लोगों को कत्ल कर के फेंक देते हैं और लोग खौफ के मारे लाशों को उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। जहाँ २४ घंटे कर्फ्यू होता है।

और हथियार क्या हैं तुबा के पास - सिर्फ़ उसकी कलम। अपनी कविताओं के जरिये वह तालिबान की तलवारों से लड़ने को तैयार है। वह कविताएँ लिखती है- उसके जैसे बच्चों के दुःख और दर्द के बारे में, स्कूल जाने से रोक दी गयी लड़कियों के बारे में, जला दी गयी किताबों के बारे में, कट्टरपंथियों के आतंक के बारे में, प्रतिरोध और विद्रोह के बारे में। और आश्चर्य इस बात का है की यह सब करते हुए उसे डर नहीं लगता। वह अपनी कविताएँ खुलेआम लोगों को सुनाती है, मीडिया को भेजती है; यहाँ तक की उसकी एक किताब भी प्रकाशित हुई है। उसने टोमैटो-मैन नाम के एक काल्पनिक पात्र की रचना भी की है जिसे वह अपनी कहानियों में इस्तेमाल करती है। उसकी एक कविता की पंक्तियाँ इस प्रकार हैं:-
आंसुओं की छोटी छोटी बूँदें,
उनके परियों जैसे मासूम चेहरे,
रक्त से धुले हुए,
वे हमेशा के लिए सोते हैं, क्रोध के साथ.
( यह मूल अंगरेजी कविता का हिन्दी अनुवाद है। )



तुबा बराक ओबामा को अपना आदर्श मानती है और व्हाइट हाउस जाकर उनसे मिलना चाहती है। वह पाकिस्तान में स्थितियों को सुधारने के लिए उनसे मदद का अनुरोध करना चाहती है।

तुबा अपनी उम्र की तुलना में कहीं ज्यादा ज़हीन और बहादुर है। वह बड़ी होकर एक एस्ट्रोनौट बनाना चाहती है; देश का नेतृत्व करना चाहती है। उसका कहना है की वह सब कुछ देखते हुए चुप नहीं रह सकती। वह अपने देश को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति दिलाना चाहती है; देश में शान्ति और खुशहाली देखना चाहती है; देश के लिए कुछ कर गुजरना चाहती है। तुबा अपने माता-पिटा की एकमात्र औलाद है। तुबा की मां कहती हैं कि यह एक औलाद सात बेटे-बेटियों से बढ़कर है। वे कहती हैं कि उन्हें अपनी बेटी पर फख्र है।


सी एन एन पर तुबा का वीडियो इन्टरव्यू देखें :----------