
इस लडकी का नाम है तुबा सहाब (Tuba Sahaab)। उम्र - ११ साल। रहती है इस्लामाबाद, पाकिस्तान के बाहरी इलाके में जो तालिबान का गढ़ माने जाने वाले स्वात घाटी से मात्र दो घंटे की दूरी पर है। इसकी तस्वीर को देखकर अगर आप इसे एक साधारण स्कूल की छात्रा समझ रहे हैं तो जनाब, आप ग़लत हैं। इस लडकी ने एक ऐसी जंग छेड़ी है जिसके बारे में सोचने मात्र से अच्छे-अच्छों के हौसले पस्त हो जाएँ। तुबा ने जंग छेड़ी है उस कट्टरपंथी इस्लामी संगठन तालिबान के ख़िलाफ़ जिसने अमेरिका जैसी विश्व शक्ति को भी हिला कर रख दिया था। और वह भी उस क्षेत्र में जहाँ जाने से मानवाधिकार संगठन भी डरते हैं। जहाँ तालिबान लोगों को कत्ल कर के फेंक देते हैं और लोग खौफ के मारे लाशों को उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। जहाँ २४ घंटे कर्फ्यू होता है।
और हथियार क्या हैं तुबा के पास - सिर्फ़ उसकी कलम। अपनी कविताओं के जरिये वह तालिबान की तलवारों से लड़ने को तैयार है। वह कविताएँ लिखती है- उसके जैसे बच्चों के दुःख और दर्द के बारे में, स्कूल जाने से रोक दी गयी लड़कियों के बारे में, जला दी गयी किताबों के बारे में, कट्टरपंथियों के आतंक के बारे में, प्रतिरोध और विद्रोह के बारे में। और आश्चर्य इस बात का है की यह सब करते हुए उसे डर नहीं लगता। वह अपनी कविताएँ खुलेआम लोगों को सुनाती है, मीडिया को भेजती है; यहाँ तक की उसकी एक किताब भी प्रकाशित हुई है। उसने टोमैटो-मैन नाम के एक काल्पनिक पात्र की रचना भी की है जिसे वह अपनी कहानियों में इस्तेमाल करती है। उसकी एक कविता की पंक्तियाँ इस प्रकार हैं:-
आंसुओं की छोटी छोटी बूँदें,
उनके परियों जैसे मासूम चेहरे,
रक्त से धुले हुए,
वे हमेशा के लिए सोते हैं, क्रोध के साथ.
( यह मूल अंगरेजी कविता का हिन्दी अनुवाद है। )

तुबा बराक ओबामा को अपना आदर्श मानती है और व्हाइट हाउस जाकर उनसे मिलना चाहती है। वह पाकिस्तान में स्थितियों को सुधारने के लिए उनसे मदद का अनुरोध करना चाहती है।
तुबा अपनी उम्र की तुलना में कहीं ज्यादा ज़हीन और बहादुर है। वह बड़ी होकर एक एस्ट्रोनौट बनाना चाहती है; देश का नेतृत्व करना चाहती है। उसका कहना है की वह सब कुछ देखते हुए चुप नहीं रह सकती। वह अपने देश को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति दिलाना चाहती है; देश में शान्ति और खुशहाली देखना चाहती है; देश के लिए कुछ कर गुजरना चाहती है। तुबा अपने माता-पिटा की एकमात्र औलाद है। तुबा की मां कहती हैं कि यह एक औलाद सात बेटे-बेटियों से बढ़कर है। वे कहती हैं कि उन्हें अपनी बेटी पर फख्र है।
और हथियार क्या हैं तुबा के पास - सिर्फ़ उसकी कलम। अपनी कविताओं के जरिये वह तालिबान की तलवारों से लड़ने को तैयार है। वह कविताएँ लिखती है- उसके जैसे बच्चों के दुःख और दर्द के बारे में, स्कूल जाने से रोक दी गयी लड़कियों के बारे में, जला दी गयी किताबों के बारे में, कट्टरपंथियों के आतंक के बारे में, प्रतिरोध और विद्रोह के बारे में। और आश्चर्य इस बात का है की यह सब करते हुए उसे डर नहीं लगता। वह अपनी कविताएँ खुलेआम लोगों को सुनाती है, मीडिया को भेजती है; यहाँ तक की उसकी एक किताब भी प्रकाशित हुई है। उसने टोमैटो-मैन नाम के एक काल्पनिक पात्र की रचना भी की है जिसे वह अपनी कहानियों में इस्तेमाल करती है। उसकी एक कविता की पंक्तियाँ इस प्रकार हैं:-
आंसुओं की छोटी छोटी बूँदें,
उनके परियों जैसे मासूम चेहरे,
रक्त से धुले हुए,
वे हमेशा के लिए सोते हैं, क्रोध के साथ.
( यह मूल अंगरेजी कविता का हिन्दी अनुवाद है। )

तुबा बराक ओबामा को अपना आदर्श मानती है और व्हाइट हाउस जाकर उनसे मिलना चाहती है। वह पाकिस्तान में स्थितियों को सुधारने के लिए उनसे मदद का अनुरोध करना चाहती है।
तुबा अपनी उम्र की तुलना में कहीं ज्यादा ज़हीन और बहादुर है। वह बड़ी होकर एक एस्ट्रोनौट बनाना चाहती है; देश का नेतृत्व करना चाहती है। उसका कहना है की वह सब कुछ देखते हुए चुप नहीं रह सकती। वह अपने देश को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति दिलाना चाहती है; देश में शान्ति और खुशहाली देखना चाहती है; देश के लिए कुछ कर गुजरना चाहती है। तुबा अपने माता-पिटा की एकमात्र औलाद है। तुबा की मां कहती हैं कि यह एक औलाद सात बेटे-बेटियों से बढ़कर है। वे कहती हैं कि उन्हें अपनी बेटी पर फख्र है।
सी एन एन पर तुबा का वीडियो इन्टरव्यू देखें :----------





बहुत आभार तुबा के बारे में जानकारी देने का. गज़ब का हौसला और गज़ब का जज्बा है. सलाम तुबा को!!
जवाब देंहटाएंसलाम तुबा के हौंसलों को। सलाम उसकी अम्मी और उसके परिवार को। काश! तुबा हर घर में हो।
जवाब देंहटाएंतुबा से मुलाकात कराने के लिए आपका आभार।
बढती जाओ तुबा आधी से अधिक दुनिया तु्म्हारे साथ और तुम्हारे पीछे है।
जवाब देंहटाएंतुबा और उसके हौसले को सलाम।
जवाब देंहटाएंबहुत ही शानदार पोस्ट लगी,तुबा के हौसले को सलाम !!!!!
जवाब देंहटाएंहमारी शुभकामनाएं तुबा के साथ है.
जवाब देंहटाएंशुभकामनाओं के साथ तुबा को सलाम।
जवाब देंहटाएंठंडे कमरों में बैठकर गर्म स्त्री-विमर्श करने वालों, कुछ सीख लो इस ११ साल की बच्ची से।
जवाब देंहटाएंसाहसिक कदम है तुबा सहाब का । ऐसे जोश और जज्बे को सलाम ।
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया पोस्ट, पसंद आई
जवाब देंहटाएंभगवान तुबा की उम्र लम्बी करे...तुबा की ढेरों शुभकामनाएं.
जवाब देंहटाएंआतंकवाद के साए में भी बढ़ते इस हौंसले को सलाम
जवाब देंहटाएंबढ़िया पोस्ट पर कुछ सवाल स्रोत को लेकर.आपने सीएनएन का नाम लिया है और ये ज़िक्र भी किया है की तुबा ओबामा को अपना आदर्श मानती है.मतलब साफ़ है की ११ साल की ये लड़की अमेरिकी मिडिया के प्रोपेगंडा की शिकार है और शायद हम भी जिन तक ये खबर प्रायोजित तरीके से पहुंची है. पर अगर इसमें कुछ भी सच है तो लड़की के हौसले को हमारा सलाम. और आपको भी शुक्रिया.
जवाब देंहटाएंSatish ji......
जवाब देंहटाएंTuba k bare me achchi jakari di hai aapne..........kafi rochak aur prerna dene wali hai Tuba...........
बहुत अच्छा लगा इस बहादुर लड़की के बारे में पढ़ कर ..शुक्रिया इसकी हिम्मत को वाकई सलाम है
जवाब देंहटाएंऐसे ही प्रयास कुछ उम्मीदें जगाते हैं.
जवाब देंहटाएं@ संजय व्यास जी
जवाब देंहटाएंटिप्पणी के लिए आपका आभार. हो सकता है की तुबा के बारे में जानकारी देने के पीछे पश्चिमी मीडिया का अपना कुछ स्वार्थ हो. पर उससे इस लडकी की प्रतिभा, हिम्मत और उसके द्वारा किये जा रहे कार्य के महत्व को तो नकारा नहीं जा सकता. दूसरी बात यह की ओबामा सिर्फ तुबा नहीं बल्कि दुनिया के कई दबे, कुचले, पीड़ित लोगों के लिए एक आदर्श हैं. इस वजह से नहीं कि वो अमेरिका के राष्ट्रपति हैं बल्कि उस कर्मठता और हौसले की वजह से जिसके बूते उन्होंने शून्य से शिखर तक का सफ़र तय किया.
अगर बराक ओबामा को खबर हो गई
जवाब देंहटाएंतो वे खुद तुबा सहाब से मिलेंगे
मुझको ऐसा लगता है
पाक के नापाकी के दिन पूरे हो लिए।
bahut acchi jaankaari de aapne...bahut aabhaar..
जवाब देंहटाएंकमाल की जीवट बच्ची है, जानकारी देने के लिये आभार। ये बच्ची किसी प्रेरणा से कम नही।
जवाब देंहटाएंबढ़िया टिप्पणी है तुका साहब की बहादुरी के जज्बे को देखकर एक बार ऐसा लगता है कि वास्तव में इन समस्याओं से निजात पाने की आवश्यकता है । इतने बड़े देश में एक लड़किया खड़ी हुई है तालिबान का विरोध करने के लिए बाकी सब क्या कर रहे है । समझा कि कलम की ताकत बहुत होती है लेकिन यह तालिबानीकरण का माकूल जबाब नही है शुक्रिया
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत शुक्रिया जनाब तुबा के बारे में बताने के लिए तुबा के जज्बे को सलाम
जवाब देंहटाएंभगवान करे तुबा की कलम से पाकिस्तान का भाग्योदय शुरु हो। उसका जज्बा हमेशा कायम रहे।
जवाब देंहटाएंबहुत महत्त्वपूर्ण और उत्प्रेरक जानकारी दी है । पढ़कर मन खुश हो गया । तुबा सहाब के बारे में भी और इस ब्लॉग के लिए पोस्ट के चुनाव के बारे में भी ।
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