रविवार, 15 फ़रवरी 2009

ससुराल गेंदा फूल



मुझे याद है मैंने जब पहली बार देहली ६ के गाने "ससुराल गेंदा फूल" को सुना था तो मैं दो मिनट तक हंसता रहा था. हुआ ऐसा था की जेएनयू के जर्मन सेंटर के मेरे एक मित्र मेरे कमरे में बैठे हुए थे. बातें करते करते अचानक वो ये गाना गुनगुनाने लगे. कुछ तो गाने के शब्द ऐसे थे और कुछ उनका गाने का लहजा कि मुझे हंसी आ गयी. हंसी रुकने पर मैंने पूछा कि कोई नई भोजपुरी एल्बम ख़रीदी है क्या? एक्चुअली वो मित्र बिहार गया जिले से है और भोजपुरी गानों के शौकीन हैं. इसपर उनहोंने आश्चर्य से मुझसे पूछा कि आपने अभी तक ये गाना नहीं सुना है क्या? आजकल तो सभी एफएम चैनलों पर देहली ६ का यही गाना छाया हुआ है.

मैं तुंरत कम्प्युटर पर बैठा और इस गाने को डाउनलोड किया. जब सुना तो सचमुच मन खुश हो गया. गीत की लय लोकगीत जैसी है पर बीट्स क़दमों को थिरकने पर मजबूर कर देते हैं. ऐ आर रहमान साहब का संगीत सचमुच काबिले तारीफ़ है. गीत को रेखा भारद्वाज, श्रद्धा पंडित और सुजाता मजुमदार ने गाया भी बड़ी खूबसूरती से है. लेकिन सबसे अधिक प्रशंसा के पात्र हैं इस गीत के लेखक प्रसून जोशी. शब्दों के प्रयोग को देखकर गुलज़ार की याद हो आती है. प्रसून जोशी सचमुच दूर की रेस के घोडे हैं .

गीत के बोल कुछ इस तरह हैं :-

सास गारी देवे, देवर जी समझा लेवे
ससुराल गेंदा फूल
सैंया छेड़ देवें, ननद चुटकी लेवे
ससुराल गेंदा फूल


छोड़ा बाबुल का अंगना, भावे डेरा पिया का हो
सास गारी देवे, देवर समझा लेवे
ससुराल गेंदा फूल

सैंया है व्यापारी, चले हैं परदेश
सुरतिया निहारूं, जियरा भारी होवे
ससुराल गेंदा फूल


बुशर्ट पहनके, खाइके बीडा पान
पूरे रायपुर से अलग है, सैंया जी की शान
ससुराल गेंदा फूल


इस गीत में "ससुराल गेंदा फूल" का मतलब मैं नहीं समझ पाया. आपलोगों को कुछ समझ आए तो बताइयेगा.
ये हो सकता है कि नायिका का व्यापारी पति उसे छोड़कर परदेश चला गया है जिससे ससुराल गेंदा फूल की तरह हो गया है जिसमें सुन्दरता तो है लेकिन खुशबू नहीं है. सैंया के बिना ससुराल बिना खुशबू के फूल की तरह है.

और क्या अर्थ हो सकते हैं? आपके विचारों का इंतज़ार रहेगा.

13 टिप्‍पणियां:

  1. अर्थ जो भी हो,गीत की धुन और आवाज प्रभावी है.

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  2. गेंदे का फूल एक फूल नहीं होता वह फूलों का समूह है अत: लेखक ने परिवार को गेंदा फूल कहा है और सारे ही रिश्‍ते बताए हैं कि यहाँ सास भी है देवर भी है और ननद भी है।

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  3. गाना बेहद पसंद है मतलब यही हो सकता है जो अजित गुप्ता जी ने बताया

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  4. ह्म्म, इस गाने को प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने अपने नाटकों में न केवल खूब प्रयोग किया है बल्कि खुद इसे गाया भी है, 70 के दशक में यह गाना आकाशवाणी रायपुर पर खूब बजा करता था, आप खुद ही सुन रहे होंगे इस गाने में रायपुर का उल्लेख है।

    बाकी आपने जो अर्थ बताया है उससे फिलहाल तो सहमत हूं, स्थानीय बुजुर्गों से चर्चा कर लिखता हूं जल्द ही इस बारे में

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  5. प्रसून जोशी ने एफ एम के एक कार्यक्रम में इस गाने के बारे में बताया था कि राजस्‍थान में प्‍यारे चीज को गेंदा कहा जाता है.... इसलिए इन्‍होने ससुराल को गेंदा फूल कहा है।

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  6. Sachmuch yah gana bahut khubsurat hai. Par dukh ki bat ye hai ki Prasoon Joshi ji ya Rakeysh Mehra ji ne kahin bhi is Chattisgarhi Lok geet ke original writer Late shri Ganga ram Shivare ka ullekh nahi kiya hai. The Song was originally sung by Late Shri Bhulwa Ram Yadav and then by Joshi sisters in 1972 who presently live in Raipur.

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  7. आप सभी आगंतुकों का मेरे ब्लॉग पर आने और अपने बहुमूल्य विचार देने के लिए धन्यवाद
    कृपया इसी प्रकार अपना आशीर्वाद बनाए रखें
    @Girish Rege
    इस जानकारी के लिए धन्यवाद.
    अगर यह सच है, तो ये सचमुच निंदनीय है.
    मूल लेखक और गायकों का कम से कम उल्लेख और आभार तो फ़िल्म में किया ही जाना चाहिए

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  8. जबसे यह गाना सुना था तो पता नही कितनी बार सुना चुका हूँ। सच दिल में उतर गया है यह गाना। और हाँ जी आपने पूछा कि गेंदा फूल क्यों कहा है? तो यही सवाल मेरे भी दिमाग में था। फिर एक पत्रकार राजेश जी है उन्होने मेल करके बताया उसका मतलब। जो इस प्रकार था।
    गेंदा फूल छत्तीसगढ़ के मैदानी इलाके में बहुतायत में मिलता है. हर किसी के बाड़ी में यह खिला हुआ देख सकते हैं. नवविवाहिता इस गीत में गेंदा फूल की बाड़ी की तरह ससुराल को गुलजार मान रही है और देवर से कुछ खट्टी मीठी शिकायतें कर रही है.

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  9. सुशील जी,
    इस जानकारी को हमारे साथ बाँटने के लिए शुक्रिया

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  10. धन्यवाद सतीश ! इस गाने के बोल जब तक यहाँ नहीं पढ़े थे तब तक हम गलतफ़हमी के शिकार थे और कुछ शब्दों को सही न सुनकर इसे नकटा की कोटि का समझते थे । (देवे को देबै समझकर) यह गलतफ़हमी दूर हो जाने के कारण यह गाना मुझे अच्छा और अच्छा लगने लगा है । और गेंदे के फूल में खुशबू रहित सुन्दरता कहकर उसके साथ अच्छा नहीं किया है (मैंने टिप्पणी देने से पहले ध्यान देने वाली बातें पढ़ ली हैं) । गेंदे की खुशबू तो बहुत सुन्दर और तेज होती है । और रही अर्थ की बात तो उस बारे में मैं बस अन्दाजा लगाने की स्थिति में हूँ ।

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  11. original version yaha hai: http://www.muziboo.com/gopendra/music/saas-gari-devai

    delhi 6 ppl just copied this and made for the movie. raghubir yadav told this folk song to rakeysh mehra as the great AR rehman was unable to churn out sumthing original.
    I pity the bollywood people that they are so away fron their so called hindi / Indian roots.
    i think our village culture is real india, movies like dilli6 stand nowhere.....it is sad indeed.

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  12. मैं कोशिश करता हूं-
    मैं छत्तीसगढ़ में ही रहता हूं और लोक परंपराओं के बारे में मुझे थोड़ा बहुत ही पता है। असल में छत्तीसगढ़ में मितान बदने की परंपरा है। मितान बदना यानी मित्र बनाना। जब दो लोगों के बीच मित्रता गाढ़ी होती है तो वे इसे मजबूत करने के लिए कोई साक्शी बना लेते हैं। साक्शी यानी गवाह। ये गवाही ज्यादातर प्राकृतिक चीजों की होती है या फिर किसी पवित्र वस्तु की। जैसे दौना पान ( तुलसी की प्रजाति का पौधा), महाप्रसाद (भगवान जगन्नाथ का प्रसाद) आदि। ये चीजें दोस्त आपस में अदल-बदल लेते हैं। फिर वे कभी दोस्त का नाम लेकर नहीं बुलाते, बल्कि उन चीजों के नामों से संबोधित करते हैं, जिसको उन्होंने गवाह रखा होता है। जैसे एक दोस्त दूसरे के लिए दौना होगा, या फिर महाप्रसाद, या फिर तुलसीदल, या फिर गेंदा फूल।
    तो मुझे लगता है कि इस गीत में गेंदा फूल इन्हीं अर्थों में है-
    नयी नवेली पहली बार ससुराल से मायके आई है और अपनी सखी से बतिया रही है। ससुराल के किस्से बता रही है। सुनों गेंदा फूल, सास बहुत गालियां देती हैं, ननद मुंहजोरी करती है। देवर समझा देते हैं।
    क्या आप मुझसे सहमत हैं ः-
    मेरे ब्लाग में विजिट करके बताएं।
    www.zaraidharbhi.blogspot.com
    या मेल करें
    kewalkrishna70@gmail.com

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