काफी दिनों से लिखना बंद था. पता नहीं क्यों जिस उत्साह से ब्लोगिंग की दुनिया में आया था धीरे-धीरे वो कम होता गया और एक समय ऐसा आया जब कुछ नया लिखने की जो उथल-पुथल सी मचती थी मन में वो खत्म सी हो हाई. इसका सबसे बड़ा कारण तो मेरा आलस्य और रचनात्मकता का अभाव है पर लगता है कुछ और भी कारण अवश्य हैं. खैर, जाने दीजिए इस बारे में फिर कभी.........
ब्लॉग पर लिखना बंद रहा पर पढ़ने का मोह कभी नहीं त्याग पाया. ज्यादा नहीं कुछेक ब्लॉग. ईमानदारी से कहूँ तो .... छोडिये फिर कभी कहूँगा....... लिखने का कीड़ा काफी दिनों से मन में कुलबुला रहा था. समझ में नहीं आ रहा था क्या लिखूं...... बस अभी ही मन में एक विचार आया.... कोइ महान विचार नहीं... सरल सीधा सा है......
चूँकि मैं विदेशी भाषा का विद्यार्थी हूँ इसलिए विदेशियों से हर दिन पाला पड़ता रहता है. और ऐसी जगह पर हूँ जहां दूसरे देशों से पढने आये छात्र काफी संख्या में हैं तो परमानेंट विदेशी मित्र भी कई हैं. इनमें से अधिकाँश के मन में भारत और भारतीय संस्कृति से जुडी बातों में गहरी दिलचस्पी होती है. छोटी-छोटी बातों में... बहुत सवाल घुमड़ते रहते हैं इनके मन में. भारत के धर्मों, त्योहारों, रीति-रिवाजों के बारे में. परेशानी तब होती है जब ये विद्यार्थी इन सवालों की बौछार हम पर करते हैं. हम विदेशी भाषाओं के विद्यार्थियों पर कुछ ज्यादा इसलिए क्योंकि हम उनकी भाषा में उन्हें समझा सकते हैं. जैसे यदि कोई कोरियाई व्यक्ति यदि मुझसे मिल गया और उसे पता लग गया कि मैं कोरियाई भाषा जानता हूँ तो बस सवालों की बौछार शुरू. अब इमानदारी की बात यह है कि हममें से अधिकाँश लोगों को इन सवालों के तर्कपूर्ण उत्तर खुद नहीं मालूम होते. अभी हम कुछ दोस्त (ज्यादातर भाषा-विद्यार्थी) गंगा ढाबा पर बैठकर चाय पीते हुए गप-शप कर रहे थे तो यही चर्चा निकल आई. कोई कह रहा था.... यार, गाइडिंग में बड़ी प्रॉब्लम होतीहै... कोई कह रहा था....यार, बड़ी शर्म आती है जब भारत कि संस्कृति से जुड़े सवालों के उत्तर नहीं दे पाते.......क्यों है ऐसा... कहीं कैरियर की होड ने युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से दूर तो नहीं कर दिया है? अगर ऐसा है तो यह वाकई खतरनाक है.
बस यही सब सोच रहा था लौटते हुए. दिमाग में आया क्यों न ब्लॉग पर कुछ लिखा जाए इस बारे में. जिन प्रश्नों का हमें सामना करना पड़ता है उन्हें ब्लॉग-जगत की अदालत में रखा जाए. मेरी योजना है कि एक-एक करके मैं इन सांस्कृतिक गुत्थियों और प्रश्नों को यहाँ रखूंगा और इन पर आपकी खरी और विस्तृत राय की अपेक्षा रहेगी. इसमें कोइ शक नहीं कि हिन्दी जगत के सर्वश्रेष्ठ बुद्धेजीवी ब्लॉग-जगत पर हैं. और अगर आप सब इस कार्य में अपना योगदान देते हैं तो यह कहीं न कहीं, भले ही बहुत छोटे स्तर पर ही सही, भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. इस श्रृंखला में भारत के सभी धर्मों, क्षेत्रों और भाषाओं से जुड़े मुद्दे शामिल होंगे. सभी ब्लोगर बंधुओं और खासकर वरिष्ठ ब्लोगरों से इस बारे में राय चाहूँगा.






मेरी सलाह है कि एक एक ब्लॉगर को ई मेल पर पकड़ कर उनके विचार लिए जाएं और उन्हें ब्लॉग पर पेश किया जाए, सवाल आपके हों और जवाब उनके। कह सकते हैं ब्लॉगर की अदालत में एक ब्लॉगर।
प्रत्युत्तर देंहटाएंखूब रचनात्मक आइडिया है। सकारात्मकता के साथ चलाइयेगा। मेरा आशीर्वाद साथ ले लीजिए।
सही कहा आपने. बहुत बढ़िया विचार है. हम आपके साथ हैं.
प्रत्युत्तर देंहटाएंआप को जिस भाषा का ग्याण है आप उस भाषा मै लिखे ओर उस मै भारत की संस्कृति से जुड़े सवालों के उत्तर दे तो बहुत अच्छा रहेगा, या फ़िर उन लोगो को वो साईडे बताये जिन से वो हमारे बारे ज्यादा से ज्यादा जान सके, लेकिन हमेशा ही गंदगी ही मत दिखलाये जेसे हमारे फ़िल्म वाले दिखाते है पैसो के लिये, अपनी अच्छाईया भी दिखाये.
प्रत्युत्तर देंहटाएंहममें से अधिकाँश लोगों को इन सवालों के तर्कपूर्ण उत्तर खुद नहीं मालूम होते......शानदार ब्लाग...बधाई....
प्रत्युत्तर देंहटाएंउत्साहवर्द्धन के लिए आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद.
प्रत्युत्तर देंहटाएं@अविनाश सर, आपने बहुत क्रिएटिव आइडिया दिया है. सोचता हूँ इसपर.
@भाटिय़ा सर, आपने बड़े महत्वपूर्ण बिंदु की और ध्यान दिलाया है. मेरे कहने का अर्थ यही था कि सही जानकारी के अभाव में युवा किसी भी सांस्कृतिक पहलू के अच्छे पक्ष को नहीं रख पाता . विशेष अगली पोस्ट में स्पष्ट करूँगा.
विदेशी भाषा सीखना और उसका दैनिक जीवन में उपयोग करना
प्रत्युत्तर देंहटाएंशायद इतना सरल ना भी हो पर नईजानकारियों के लिए बहुत अच्छा है |किसी भी संस्कृति को करीब से जानने के लिए वहां की भाषा पर पूरा कमांड भी आवश्यक होता है |आप सही दिशा में जा रहे हैं |
आशा
I agree that the foreigners are very curious about indian culture, and it is very difficult to satisfying them with little knowledge. But it is a world trend , that the youths are making a new culture which is drastically different from their own culture. Such as japanis youth are more knowledgeble about harry potter than Zen meditation. This is a global trend.
प्रत्युत्तर देंहटाएंI don't think that the ignorance about our culture is because we youths are more carearist . It is because our culture is changing rapidly, now our new culture is more gloablised, the youth icons of this new culture are not solemly from indian history, but from around the world, from centuries our philosopher are trying to convey the massage of one culture and one religion of humanity, now the globalisation of culture is leads us toward this beautiful reality , I think that we are rapidly moving towards a single world culture. This culture is not based on any single previous culture but this is a beautiful mixture of all world culture. As a rule new culture are not entirely new but they have inherited best of the previous cultural objects, such as yoga and zen (japan).
Shashikant bro,
प्रत्युत्तर देंहटाएंthank You so much for such an analytical comment...
interesting blog, i will visit ur blog very often, hope u go for this website to increase visitor.Happy Blogging!!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंNice blog & good post. overall You have beautifully maintained it, you must try this website which really helps to increase your traffic. hope u have a wonderful day & awaiting for more new post. Keep Blogging!
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत अच्छी भावना..अपने देश की संस्कृति और विचारों को विदेश में सही रूप से प्रस्तुत करने का आपका विचार सराहनीय है.शुभकामनायें
प्रत्युत्तर देंहटाएंसतीश भाई,
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपकी यह पहल अत्यन्त प्रशंसनीय है...हिन्दी के हर ब्लॉगर को इसमें यथासंभव सहयोग-समिधाएँ देनी ही चाहिए।
इस क्रम में मेरा सहयोग सदैव रहेगा...शीघ्र ही भारत की एक बहु-प्रसारित पत्रिका में ‘ब्लॉग भ्रमण’ नामक एक स्तम्भ शुरू करने जा रहा हूँ, उसमें आपके ब्लॉग की इस सराहनीय पहल का उल्लेख करने का प्रयास करूँगा!
शेष क्रमशः
जितेन्द्र ‘जौहर’
मोबाइल नं. +91 9450320472